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Wednesday, January 16, 2019

अंधाधुन **********

अंधाधुन
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What is life?
It depends on liver.

फिल्म शुरू यहाँ से होती है। और अगर फिल्म शुरू से नहीं देखी तो सारा मज़ा किरकिरा हो जायेगा।
एक अंधा जो कावाई का पियानो बजा रहा होता है और साथ में एक बिल्ली खेल रही होती है। फिल्म का ये सीन मुराकामी के लेखन की याद दिलाता है , जिसमें की सिम्फनी, पियानों और बिल्ली मुख्य पात्र होते हैं।
प्रमोद सिन्हा (अनिल धवन) और तब्बू का कैरेक्टर फिल्म की जान है। पुलिस एस एच ओ का रोल जँचता है, मानव विज पर।
आयुष्मान खुराना ठीक ठीक ही नज़र आते हैं हालांकि मुख्य किरदार होने के बावजूद । राधिका आप्टे के रोल में जितनी गुंजाइश थी उतना उन्होंने निभाया है।
साईड कैरेक्टर के रूप में ऑटो वाले, बाई और डॉक्टर के किरदार अच्छे हैं।
चित्रहार और पुराने गाने बखूबी इस्तेमाल किये गये हैं। फिल्म में सस्पेंस तो है मगर सेंस ऑफ परपज़ नहीं है। सेकेंड हॉफ में फिल्म निराश करती है। मगर पूरे समय आपको बाँधे रखती है।
एक खरगोश पर चली गोली फिल्म का असली सस्पेंस है। फिल्म देखने टाइम पर जायें। फिल्म पहले सीन से शुरू होकर आखिरी सीन पर खत्म होती है।

Friday, September 21, 2018

फिल्म पद्मावती

 फिल्म पद्मावती अच्छी है। इतिहास से ताल्लुक कम भंसाली की कल्पना से ज्यादा है।

खिलजी अरबी गाने अच्छा गाते हैं। अब ये नहीं पूछना चाहिए कि तुर्क अरबी कैसे गा रहे हैं। याअल्ला हबीबी गाना अच्छा लगता है। बस बेल्ली डांस की जगह जंगली डांस है। खिलजी उस समय के तुर्क थे तो जब गाना और म्यूज़िक दे सकते हैं तो जोधा अकबर की तरह सूफी डांस ही करवा देते।

बिन्ते ए दिल मिसीरिया में वाला गाना भी अच्छा है। मलिक काफूर का रोल जिस बंदे ने किया है वो सही जम रहा है।

मेहरून्निसा के रोल में अदिति राव हैदरी अच्छी लगीं है। वो खुद भी हैदराबाद के निजाम के खानदान से ताल्लुक रखती हैं । शाही खून चेहरे पर नज़र आता है।

भंसाली जी को गुलाबी आँखे बहुत पसंद हैं । दोनों मल्लिकाएँ हर वक्त हल्की गीली गुलाबी आँखों में नज़र आती हैं।

बाजीराव मस्तानी वाला पागलपन डांस रणबीर सिंह इसमें और आगे ले गये हैं।

शाहिद कपूर सिक्स पैक ऐब्स वाले राणा ऱावल सिंह के रोल में जंच रहे हैं पर दीपिका के सामने बच्चे लग रहे हैं। रतन सिंह की पहली पत्नी अपने मोतियों के हार के लिए इसरार करती है और सिंहल द्वीप से मोती लाने राणा सा निकल जाते हैं। मोती तो लाते ही हैं साथ में पद्मावती को भी ले आते हैं।

पहली रानी को गलती का एहसास होता है कि बेवजह की डिमांड से क्या होता है ।

दीपिका पद्मावती लगती भी हैं और रोल भी अच्छा निभाया है। सिंहल द्वीप के सुंदर झरनों के बीच हिरनी का  शिकार करती राजकुमारी का  सीन अच्छा है।

रज़ा मुराद जलालुद्दीन ख़िलजी के रोल में पुराने दौर की याद दिलाते हैं।

फिल्म इतिहास लॉजिक और हकीकत से बिल्कुल परे है जैसा कि डिस्क्लेमर कहता है।

तंदूरी  मटन और तंदूरी चिकन देख पेट की भूख बढ़ जाती है।

फिल्म मूलतः जौहर को समर्पित है। आधा घंटा उसी की तैयारी चलती है।

पैसा और टाईम दोनों हो तो टाईमपास  कर सकते हैं।

Al Farabi on Societies

Al-Farabi was a famous philosopher from the Islamic philosophy tradition. On the question of why and how societies decline from the ideal, h...